माघ मेला इलाहाबाद जानकारी

Magh Mela Snan Allahabad in Hindi

नई दिल्ली, 3 जनवरी 2018- तीर्थराज प्रयाग और संगम नगरी नाम से पहचाने जाने वाले इलाहाबाद शहर में माघ मेले की शुरूवात 2 जनवरी 2018 से हो गयी है. लोग कल्पवास के लिए दूर दूर से पहुँचने लगे हैं. माघ मेले (Magh Mela 2018 in Hindi) का महत्व हिंदू धरम में आदिकाल से ही चला आ रहा है. संगम नगरी इलाहाबाद में गंगा-यमुना और सरस्वती के मिलन स्थल लगने वाला यह मेला हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए बहुत ही पवित्र और श्रधा का प्रतीक है. संगम तट पर कल्पवास की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है। इस साल का कल्पवास का यह पर्व 2 जनवरी 2018 को पौष पूर्णिमा के साथ हो चुका है। यहाँ कल्पवास के लिए हर राज्य से लोग आते हैं. या मेला पूरा 1 महीना चलता है. वैसे तो कल्पवास लोग मेले के शुरूहोते ही रखना शुरू कर देते हैं लेकिन कुछ लोग मकर संक्रांति से भी कल्पवास आरंभ करते हैं। कल्पवास के बारे में लोगों की आस्था है की प्रयाग में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने और इस प्रवित महीने में के कल्पवास रखने से ब्रह्मा का एक दिन का पुण्य मिलता है। या कहें की अपलवास से भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद मिलता है.

क्या महत्व है कल्पवास का हिंदू धर्म में- Kalpwas in Hindu Religion

हिंदू धर्म में कल्पवास को एक विशेष महत्व है. और कल्पवास की चर्चा वेदों में, महाभारत में और रामचरितमानस में मिलती है। कल्पवास एक माध्यम भी हैं भगवान से जुड़ाव का. या नई और पुरानी पीढ़ी के लिए आध्यात्म की राह का एक पड़ाव भी है. कल्पवास मान की शांति और शुधीकरण का ज़रिया. और अपने आराध्या की सेवा और उससे जुड़ने का ज़रिया है जिसके जरिए आत्मशुद्धि का प्रयास किया जाता है। इस टेक्नालजी के युग में जहाँ लोग एक एक सेकेंड अपने आप को बिज़ी रखते हैं वही लाखों लोग ऐसे भी हैं जो आत्मशुद्धि के लिए हास साल संगम नगरी आते हैं कल्पवास के लिए. बदलते समय के अनुरूप कल्पवास तौर-तरीके में ज़रूर कुछ ना कुछ बदलाव जरूर आए हैं लेकिन कल्पवास करने वालों की संख्या में कभी भी कमी नहीं आई। यहाँ हर उम्र के लोग कल्पवास करते हुए देख जाते हैं.

Magh mela special train

कौन-कौन कर सकता है कल्पवास- Kaun Kar Sakta Hai Kalpwas

Kalpwas in allahabad- कल्पवास के लिए मोह नही होना चाहिए. ज़िम्मेदारी से मुक्त होना चाहिए क्यूंकी अगर किसी के उपर ज़िम्मेदार है तो वो सही से कल्पवास नही कर सकता. यह केवल एक साधारण व्र्त नही है. यही पूरे महीने घर से दूर और गंगा यमुना नदी के किनारे टेंट लगाकर भगवान की तपस्या है और आत्मशुद्धि का एक प्रयास. वैसे तो कल्पवास के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि कल्पवास वो लोग रखते हैं जो संसारी मोह-माया से मुक्त और जिम्मेदारियों को पूरा कर चुके हों.

कैसे शुरूवात होती है कल्पवास की

कल्पवास में तुलसी और शालिग्राम का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है. दोनो को ही हिंदू धर्म में विशेष स्थान दिया गया है. कल्पवास की शुरुआत तुलसी और शालिग्राम की स्थापना और पूजन से होती है। हर एक कल्पवासी जिस टेंट में अपना बसेरा बनाता है वह उसके बाहर जौ का बीज रोपित करता है। और रोज इस जौ के बीज की देख रेख करता है. इसके अंकुरित होने से पौधे बनने तक उसकी देखबाल करता है. अपने आस पास सफाई का विशेष ध्यान दिया जाता है ख़ासकर इस जौ के पौधे के आस पास क्यूँ की रोज इसकी गंगा जल से पूजा होती है और सूर्य देव को जल चढ़ाया जाता है. कल्पवास की समाप्ति पर जौ के पौधे को अपने साथ ले जाता है। जबकि तुलसी को गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता है।

माघ मेला 2018 की विशेषतायें- Latest Magh Mela Images

Allahabad magh mela 2018 news

गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर माघ मेला की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस साल माघ मेला 1797 बीघे में फेला हुआ है. इस साल माघ मेले का पहला स्नान पौष पूर्णिमा 2 जनवरी को हो गया है। और इसी के साथ 1 महीने तक चलने वाले इस मेले में हर दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुँचने लगे हैं. इस साल लगभग 5 लाख कल्पवासी मेला क्षेत्र में एक महीने रहेंगे। कुल 18 घाट बनाए गए जहाँ लोग स्नान कर सकेंगे. हर साल की तरह इस साल भी मेला के 6 प्रमुख स्नान पर्व हैं। माघ मेला क्षेत्र में कुल 45 सीसीटीवी कैमरे और 12 वाच टावरों बनाए गए हैं। 7 बड़े-बड़े स्थानों पर एलईडी टीवी लगाए लगे हैं। जगह जगह पर पोलीस की स्पेशल टीम लगाई गयी हैं ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना ना घटे. इस बार मेले में कुल 5 पांटून पुलों की कुल संख्या हैं. जिससे लोग नदी के इस पार और उस पार जा सकें.

माघ मेला के मुख्य स्नान- Magh mela Snan 2018 dates

इस साल 6 मुख्य स्नान हैं जिनमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की संभावना है. इस साल के मुक्य स्नान इस प्रकार हैं-

दिन और वार स्नान
2 जनवरी मंगलवार पौष पूर्णिमा
14/15 जनवरी, रविवार/सोमवार मकर संक्रांति
16 जनवरी, मंगलवार मौनी अमावस्या
22 जनवरी, सोमवार वसंत पंचमी
31 जनवरी, बुधवार माघ पूर्णिमा
13 फरवरी, मंगलवार महाशिवरात्रि

माघ मेला 2018 में चलेंगी 20 स्पेशल ट्रेनें- Special train for magh mela

2 जनवरी से शुरू हो चुके माघ मेले के लिए रेलवे ने 15 मेमू और 8 डेमू ट्रेन चलाएगा। 2 जनवरी से 13 फरवरी तक 15 रुपए से ज्यादा का टिकट खरीदने पर मेला सरचार्ज लगेगा। रेलवे ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इलाहाबाद जंक्शन, नैनी, इलाहाबाद छिवकी स्टेशन और माघ मेले में टिकट के लिए अतिरिक्त काउंटर खोले है।

माघ मेला स्पेशल ट्रेन इलाहाबाद से कानपुर की तरफ, इलाहाबाद से चुनार/मुगलसराय की तरफ, इलाहाबाद से मानिकपुर/झांसी की ओर चलाई जाएँगी.

कैसे पहुँचे माघ मेला स्थल, इलाहाबाद

How to reach magh mela Allahabad

माघ मेला बहुत आसानी से पहुँच जा सकता है. क्यूँ की यह इलाहाबाद शहर में गंगा यमुना नदी के किनारे संगम में लगता है. वैसे भी इलाहाबाद भारत के हर एक छोटे और बड़े शहर से सडक, हवाई और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है. आप किसी भी साधन से माघ मेला परिसर आसानी से पहुँच सकते है. भारतीय रेल भी माघ मेले के समय हर साल स्पेशल ट्रेन चलाती है.

लखनऊ से इलाहाबाद की दूरी – 202 किलोमीटर

कानपुर से इलाहाबाद की दूरी – 213 किलोमीटर

देहरादून से इलाहाबाद की दूरी – 914 किलोमीटर

जयपुर से इलाहाबाद की दूरी – 738 किलोमीटर

आगरा से इलाहाबाद की दूरी – 497 किलोमीटर

दिल्ली से इलाहाबाद की दूरी – 715 किलोमीटर

मुंबई से इलाहाबाद की दूरी – 1415 किलोमीटर

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