महाराणा प्रताप जीवनी

महाराणा प्रताप को भारतीय इतिहास में वीर योद्धा और साहसी शासक के रूप जाना जाता है. हिन्दू पंचांग विक्रम सम्वत के अनुसार उनकी जयंती हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है और अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार 9 मई, 1540 की तारीख है. महाराणा प्रताप के साहस और वीरता के किस्से हम सभी लोग बचपन से पढ़ते आ रहे हैं. महाराणा प्रताप राजपूतों में सिसोदिया वंश के वंशज थे. महाराणा प्रताण को कभी भी मुगलों के आगे झुकना मंजूर नहीं था उनकी छोटी-सी सेना होने के वावजूद उन्होने शत्रुओं को नाकों चने चबवा दिए थे.

महाराणा प्रताप के जन्म के समय दिल्ली में अकबर का शासन हुआ करता था और अकबर की शासन करने और अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए सभी राजा-महाराजाओं को अपने आधीन कर लेता था. उसने कई बार महाराणा प्रताप को भी अपने अधीन करने और अपने साथ मिलाने का प्रलोभन दिया लेकिन महाराणा प्रताप ने यह प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक मेवाड़ आजाद नहीं होगा, वे राज महलों में नही रहेंगे और महलों की ज़िंदगी छोड़कर जंगलों में रह कर मेवाड़ राज्य की रक्षा करेंगे.

महाराणा प्रताप जयंती – Maharana Pratap Jayanti in Hindi

हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को महाराणा प्रताप की जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस दिन स्कूल और सरकारी संस्थानो में सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाते है. और जगह जगह कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है. और कवि लोग अपनी वीर रस से परिपूर्ण अपनी कवितायें सुनते हैं.

महाराणा प्रताप की जयंती 2018 में कब है?

Maharana Pratap Jayanti 2017 Date

हिंदी पंचाग के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्महर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस साल यानी 2018 में महाराणा प्रताप की जयंती 16 जून 2018 शनिवार के दिन मनाई जाएगी.  इस दिन मनाई जाती है. इस वर्ष 2017 में 28 मई 2017, दिन रविवार को मनाई जाएगी.

महाराणा प्रताप जीवन परिचय-

Maharana Pratap Wiki in Hindi

  • जन्म                    9 मई 1540
  • पिता                    उदय सिंह
  • माता                    जयवंता बाई जी
  • पत्नी                     अजबदे
  • पुत्र                      अमर सिंह
  • जन्म स्थान           मेवाड़, राजस्थान
  • मृत्यु                    29 जनवरी 1597
  • साम्राज्य              मेवाड़, चित्तोडगढ़
  • घोड़ा                  चेतक

हल्दीघाटी युद्द – Haldi Ghati War History in Hindi

हल्दीघाटी का युद्द विश्व इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध था.  मुगलों और राजपूतों के बीच लड़ा गया यह युद्ध कई कारणों से इतिहास में प्रसिध है. अकबर की चालाकी और साम्राज्य विस्तार की नीति ने उसको इस युद्ध में जीत दिलाने का महत्वपूर्ण रोल प्ले किया. महाराणा प्रताप के हारने का प्रमुख कारण कई राजपूतों का  प्रताप के साथ किया गया विश्वासघात था. अकबर द्वारा दिए गये लालच के कारण कई राजपूत महाराणा प्रताप का साथ छोड़ गए और अकबर की आधीनता स्वीकार कर ली. राजा मान सिंह उन विद्रोही राजपूतों में से एक थे जिन्होने चंद पैसों और शानो शॉकेट के लिए महाराणा प्रताप के साथ गद्दारी की और अकबर की तरफ से सेना का नेतृत्व किया.

दूसरी तरफ बहुत से अफ़गानी राजाओं ने महाराणा प्रताप का साथ निभाया और युद्ध के समय साहस दिया. हल्दीघाटी का युद्ध कई दिनों तक चला. महाराणा प्रताप की सेना और मेवाड़ की प्रजा ने मिलकर अकबर की सेना का डटकर मुकाबला किया. एक तरफ किले में प्रजा और महाराणा प्रताप की सेना और दूसरी तरफ अकबर की सेना थी.  मेवाड़ की प्रजा और राजकीय लोगों से मिलकर और साहस के साथ लड़ाई लदी लेकिन लंबे युद्ध के कारण किले में अन्न जल तक की कमी होने लगी. महिलाओं ने भी युद्ध में बरपुर सहयोग दिया. महिलाओं ने  स्वयं का भोजन कम कर दिया ताकि की सेना और बच्चों को भरपूर खाना मिल सके. किले में लगातार खाने पीने की चीज़ों की कमी होने लगी इसके वावजूद सभी मे अकबर की सेना का कड़ा मुकाबला किया और अंत तक हार नही मानी. उनकी एकता और  हौसलों को देख अकबर भी महरण प्रताप और उनकी सेना की प्रसंशा करने से खुद को रोक नहीं पाया. इस तरह लगातार लंबा चलते हुए अन्न और हथियारों के आभाव में महाराणा प्रताप यह युद्ध हार गये. युद्ध में हार और अपनो को खोने के कारण युद्ध के आखरी दिन जोहर प्रथा को अपना कर सभी राजपूत महिलाओं ने अपने आपको अग्नि को समर्पित कर दिया.

महाराणा के सबसे वरिष्ठ अधिकारीयों ने युद्ध के एक दिन पूर्व महाराणा प्रताप और उनके पुत्र अजब्दे को नीन्द की दवा देकर किले के गुप्त रास्ते से उनको बाहर सुरक्षित बाहर निकाल दिया. सबका यही सोचना था की राजपुताना वंश कोबनाए रखने के लिए प्रताप का सुरक्षित होना बहुत ज़रूरी है. बाद में जब अकबर ने किले में प्रताप को नही पाया तो वह बहुत मायूस हुआ और प्रताप की बहादुरी और चालाकी का कायल हो गया.

महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्द हारने का कारण

Main reason of Pratap’s defeat in battle of Haldighati

राजपूतो में एकता की कमी, सत्ता का लालच और आपसी मतभेद

ये ही वो 3 प्रमुख कारण हैं जिनके करना महाराणा प्रताप को हल्दी घाटी के युद्ध में हार का सामना करना पड़ा. जैसा कि कहा जाता है घर का भेदी लंका ढाए! ऐसा ही कुछ देशद्रोही और लालची राजपूतों में महाराणा प्रताप के साथ किया. चंद लालची लोग अकबर के बनाए जाल में फँस गये और उसके द्वारा दिए गये लालच में आकर ही महाराणा प्रताप के साथ गद्दारी करने में सफल हुए.

महाराणा प्रताप से जुडी महत्वपूर्ण जानकरी:

Interesting facts about Maharana Pratap

  • महाराणा प्रताप की लंबाई 7’5 फीट थी. उनका वजन 110 किलोग्राम था. महाराणा प्रताप की तलवारबहुत ही वजन वाली थी.
  • महाराणा प्रताप के भाला, कवच, ढाल और तलवार का कुल वजन 207 किलोग्राम था जिसमे 80 किलो वजन तो केवन भाले का था.
  • सिर्फ 20000 सैनिक लेकर अकबर के 85000 सैनिको से महाराणा प्रताप ने युद्द लड़ा था.
  • अकबर ने कई बार अलग अलग तरह के लालच दिए लेकिन महाराणा प्रताप कभी भी झूके नही.
  • महाराणा प्रताप के हल्दी घाटी युद्द में प्रयोग की हुई तलवार, कवच उदयपुर राज घराने के मियुजियम में आज भी सुरक्षित रखी हुई हैं

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