महाशिवरात्रि में पूजा में न करें ये गलतियां

Mahashivratri Jalabhishek Time 2018-19

Mahashivratri 2018- हर साल की तरह इस साल भी महाशिवरात्रि पर्व की अभी से तैयारियाँ होने लगी. इस साल महाशिवरात्रि का पर्व दो दिन पद रहा है. भारत में कुछ जगहों में 13 फरवरी को मनाया जाएगा तो कुछ जगहों में 14 फरवरी को. हिंदू धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के भक्त उनको प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं. माना जाता है की इस दिन व्रत करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और मोक्ष प्राप्ति का वरदान देते हैं. माना जाता है की महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले सभी शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। एक और कथा के अनुसार आज के ही दिन भगवान शिव का मां पार्वती के साथ विवाह हुआ था इसलिए इस दिन को महाशिवरात्रि के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

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महाशिवरात्रि 2018 पूजा का शुभ समय

Mahashivratri 2018 date and time

हिंदू धर्म में शिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस साल हिंदू पांचांग के अनुसार  चतुर्दशी तिथि मंगवलार 13 फरवरी  22:36 से प्रारंभ होगी, जो व्रह्स्पतिवार 15 फरवरी 2018, 00:48 बजे खत्म होगी। महाशिवरात्रि का शुभ मुहूरत 13 फ़रवरी रात 10 बजकर 36 मिनट से 15 फ़रवरी प्रातकाल 00:36 मिनट तक है. इस तरह साल 2018 में महाशिवरात्रि 13 और 14 फरवरी को दो दिन मनाई जाएगी.

भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक

महाशिवरात्रि पर्व में भगवान शिव की पूजा की जाती है और शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है और बेल पत्र चढ़ाया जाता है.  जलाभिषेक और पूजा में सॉफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है. महाशिवरात्रि पर मंदिरों और शिवालयों में भक्‍त लंबी-लंबी कतारों में लगकर भोलेनाथ की पूजा करते हैं। इस द‍िन श‍िवलिंग पर जल चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होती हैं. माना जाता है कि अव‍िवाह‍ित कन्‍याएं अगर पूरी श्रद्धा के साथ महाशिवरात्रि का व्रत करें तो उन्हें योग्य वर मिलता है और उनका वैवाहिक जीवन सरल और सफल होता हैं.

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जलाभिषेक में ना करें ये 3 गलतियाँ

Must Know Facts about Mahashivratri Puja

  1. शिवलिंग का जलाभिषेक करना हर व्रत करने वेल के लिए अनिवार्य माना जाता है. शिवलिंग का जलाभिषेक करते वक़्त पानी में चावल दाने ज़रूर डालना चाहिए ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है. लेकिन ध्यान रहे कि चावल टूटे हुए ना हों.  टूटे हुए चावल से जलाभिषेक करना अशुभ माना जाता है.
  2. भोलेनाथ धतूरे का फूल बहुत पसंद माना जाता है. इसीलिए शिवरात्रि पूजा में लोग धतूरे का फूल चढ़ाते हैं। लेकिन केतकी का फूल भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए। ठीक इसी प्रकार भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है.
  3. भगवान शिव को बेलपत्र बहुत ज्यादा प्रिय हैं. भगवान शिव को तीन पत्तियों या इससे ज्यादा पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं। सूखा हुआ ये खंडित या कीड़ा लगा हुआ बेलपत्र बिल्कुल भी ना चढ़ायें.

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