महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

शिवरात्रि (Shivratri) का हिन्दी मतलब होता है वो दिन जो भगवान शिव की आराधना और याद में गुजर जाये। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी “महाशिवरात्रि” कहलाती है।

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? Mahashivratri Kyo Manai jati hai

पुराण और ग्रंथो में बताया गया है क्यूँ मनाई जाती है महाशिवरात्रि? इस बारे में बहुत से कथन हैं. महाशिवरात्रि मानने के कारण बहुत से हैं जैसे की-

  1. हिंदू धर्म में पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के जन्म दिन को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माना जाता है की भगवान शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। और तभी से इस दिन शिवलिंग की पूजा की जाती है। और शिवालयों में भक्त शिव की पूजा अर्चन करते हैं.
  2. एक कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन में सबसे पहले कालकूट विष निकल था जिसको भगवान शिव ने संपूर्ण ब्राह्मांड की रक्षा के लिए पी लिया था। तभी से भगवान का कंठ नीला पड गया. तभी से भगवान को देवो के देव महादेव कहा जाने लगा. माना जाता है की समुद्र मंथन के इस दिन को ही शिवरात्रि थी.
  3. एक और मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव का माता पार्वती जी के साथ विवाह हुआ था। इस दिन भक्त भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा अर्चना करते हैं और शुख और शांति का आशीर्वाद माँगते हैं.

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कैसे मनाई जाती है शिवरात्रि? How do you celebrate mahashivratri?

हिन्दुस्तान और पूरे विश्व में जहाँ जहाँ हिंदू धर्म को मानने वेल रहते हैं वहाँ शिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूम धाम और हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के पर्व का हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है. इस दिन घर की सभी महिलाएं प्रातः काल जागकर स्नान आदि करके भगवान शिव के मंदिर जाती है। इस दिन सभी लोग भगवान शिव का व्रत करते हैं. महिलायें मंदिरों और शिवालयों में शिवलिंग का जलाभिषेक कर दुग्धाभिषेक करती हैं. इसके बाद भगवान शिव को फूल आदि अर्पित कर उन्हें टीका लगाती है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, आख आदि फल-फूल चढाती है। बेलपत्र आदि चढ़ाने के बाद भगवान शिव को मीठे का भोग लगाती है। भोग लगाने के बाद शुध घी में दीए जलाकर भगवान शिव की पूजा अर्चना करती है.  माना जाता है की इस दिन भगवान शिव का व्रत करने से वो प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं.

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