“मां पूर्णागिरि” के दरबार में आपकी हर मन्नत पूरी होगी

पूर्णागिरि मंदिर दर्शन 2019- पूर्णागिरि मेला

पूर्णागिरी मंदिर का इतिहास- History of Purnagiri Mandir

हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखण्ड राज्य के कण-कण में देवी-देवताओं का वास होने के चलते इसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है | यहाँ हिंदू धर्म के बहुत से धार्मिक स्थल हैं इन्ही स्थलों में से एक है “माँ पूर्णागिरी” का दरबार. पूर्णागिरि माता का मंदिर उत्तराखंड में टनकपुर से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. माँ पूर्णागिरि का मंदिर चंपावत जिले में समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माँ पूर्णागिरि का मंदिर काली नदी के तट पर स्थित है जो की 108 सिद्ध पीठों में से एक है। हर साल नवरात्र के दौरान (मार्च के महीने में) यहां मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में आस-पास के इलाकों और दूसरे प्रदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी पूर्णागिरि के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। हर साल मार्च के महीने में भक्तों के आने का सिलसिला लगा रहता है। चैत्र नवरात्र से शुरू होने वाला मां पूर्णागिरी का यह मेला जून माह तक चलता है।

पूर्णागिरी मंदिर भारत- नेपाल बॉर्डर पर पड़ता है। पूर्णागिरी का मंदिर हरे-भरे पहाडों से घिरा हुआ है. हिमालय के नज़दीक होने की वजह से साफ स्वच्छ हवा, हरे भरे जंगल, और काली नदी का कल-कल करता हुआ बहता पानी मंदिर की सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं.  यहां हर साल हजारों भक्त मुरादें मांगने आते हैं।

Purnagiri temple tanakpur

पूर्णागिरी मंदिर की स्थापना:- Purnagiri Mandir Uttarakhand

यहाँ ऐसी मान्यता है की जब भगवान शिव तांडव करते हुए यज्ञ कुंड से सती के शरीर को लेकर आकाश गंगा मार्ग से जा रहे थे | तब भगवान विष्णु ने तांडव नृत्य से क्रोधित होकर सती के शरीर के अंग के टुकड़े कर दिए जो आकाश मार्ग से पृथ्वी केअलग अलग स्थानों में जा गिरी | ऐसी मान्यता है की इन जगहों में ही माता शेरवाली, महरवाली, नैना देवी और अन्य देवियों का वास हुआ. कथा के अनुसार जहा जहा देवी के अंग गिरे वही स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गए | ऐसी मान्यता है माता सती का “नाभि” अंग  “पूर्णा” पर्वत पर गिरा और तभी से पूर्णा पर्वत में माँ “पूर्णागिरी मंदिर” की स्थापना हुई |

पूर्णागिरी मंदिर की मान्यताPurnagiri Mandir Ki Manyata

मंदिर की मान्यता यह भी है जो भी यहाँ अपनी मनोकामना माता से माँगता है वह मंदिर परिसर में रंगबिरंगी लाल-पीली चीरे को बाँधता है और मनोकामना पूरी होने पर पूर्णागिरी मंदिर के दर्शन व आभार प्रकट करने और ‘चीर की गांठ’ खोलने आने की मान्यता भी है | अगर आप पहली बार माता के दरबार में पहुँचोगे तो आपको पता चल जाएगा की इस मंदिर में हर किसी की मनोकामनायें पूरी हुई हैं. हर साल लाखों लोग अपनी मनोकामना माता से मनवाने यहाँ आते हैं. और इसका जीता जागता उदाहरण हैं यहाँ बाँधे गये लाल-पीली चीरे. जिनमें लोगों ने अपनी अपनी मनोकामना माँ से माँग रखी होती हैं.

Purnagiri mandir ki manayta

पूर्णागिरी मंदिर कैसे पहुँचे-How to reach Purnagiri Mandir

मंदिर में पहुंचने के लिए आप टनकपुर से प्राइवेट टैक्सी बुक कर सकते है. टनकपुर से टैक्सी द्वारा ठूलीगाड़ जाते हैं जो की यात्रा का पहला पड़ाव है. ठूलीगाड़ का मतलब कुमाऊंनी भाषा में बड़ी नदी होता है. ठूलीगाड़ से मां पूर्णागिरी की पैदल यात्रा शुरू हो जाती है। ठूलीगाड़ से कुछ दूर हनुमान चट्टी पड़ता है।

हनुमान चट्टी यात्रा का दूसरा पड़ाव है. यहाँ आपको अस्थायी दुकान और आवासीय झोपड़ियां दिखाई देंगी। हनुमान चट्टी से फिर तीन किमी. की चढ़ाई चढ़ने के बाद आप पूर्णागिरी मंदिर पहुंच जाएंगे. माता के मंदिर के अलावा सिद्ध बाबा मंदिर, झूठे का मंदिर, भैरो बाबा मंदिर के भी दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है.

Purnagiri temple photo

मंदिर पहुँचने के लिए सबसे पहले आपको टनकपुर पहुँचना होगा. टनकपुर से फिर प्राइवेट टैक्सी या सरकारी बस से मंदिर परिसर पहुँचा जा सकता है. टनकपुर आप उत्तर भारत के हर बड़े शहर से आसानी से पहुँच सकते हो. टनकपुर पहुँचने के लिए लखनऊ, दिल्ली, आगरा, कानपुर, देहरादून, शिमला, चंडीगढ़, मोहाली, कानपुर और अन्य शहरों से सीधी बस सेवा द्वारा जुड़ा हुआ है. बरेली और पीलीभीत के रास्ते आप ट्रेन से भी टनकपुर पहुँच सकते हैं.

ठहरने के स्थान-

यात्रा से लौटने के बाद आप टनकपुर स्थित बस स्टेशन के आस-पास स्थित होटलों में रुक सकते हैं। या फिर नज़दीक के किसी हिल स्टेशन का रुख़ कर सकते हैं.

पूर्णागिरी से शहरों की दूरी- Purnagiri mandir distance from cities

माता पूर्णागिरी के मंदिर दर्शन के लिए भारत के किसी भी कोने से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है. आप यहाँ रोड के माध्यम से, ट्रेन मार्ग से या फिर हवाई मार्ग से पहुँच सकते हैं. इस पोस्ट में हम पूर्णागिरी से भारत के प्रमुख शहरों की दूरी आप लोगों के साथ सेयर कर रहे हैं जो की आप को बहुत हेल्पफुल शाबित होगी अगर आप भी माता पूर्णागिरी के दर्शन का प्लान कर रहे हैं.

पूर्णागिरी टनकपुर से लखनऊ 294 km

पूर्णागिरी टनकपुर से कानपुर 338 km

पूर्णागिरी टनकपुर से इलाहाबाद 502 km

पूर्णागिरी टनकपुर से बरेली 135 km

पूर्णागिरी टनकपुर से उन्नाव 330 km

पूर्णागिरी टनकपुर से आगरा 350 km

पूर्णागिरी टनकपुर से सीतापुर 203 km

पूर्णागिरी टनकपुर से मुरादाबाद 163 km

पूर्णागिरी टनकपुर से मेरठ 280 km

पूर्णागिरी टनकपुर से शाहजहाँपुर 280 km

पूर्णागिरी टनकपुर से पीलीभीत 62 km

पूर्णागिरी टनकपुर से दिल्ली 375 km

पूर्णागिरी टनकपुर से मुंबई 1558 km

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