जन्माष्टमी क्यों मनाते है? जन्माष्टमी पूजा मुहूर्त

जन्माष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त और महत्व

जन्माष्टमी / कृष्ण जन्मोत्सव- About Janmashtami in Hindi

हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है. जन्माष्टमी यानी भगवान कृष्ण के जन्म का दिन. जन्माष्टमी का त्यौहार हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है. जन्माष्टमी त्योहार की तैयारियां घरों और मंदिरों में 10-12 दिन पहले से ही खूब जोर-शोर से शुरू हो जाती है. लोग जन्माष्टमी के त्यौहार को पूरे जोश और उत्साह से मानते हैं. इस दिन घर, बाज़ार और मंदिर और चारों ओर का वातावरण भगवान श्रीकृष्ण के रंग में ही डूबा रहता है. लोग अपने अपने बच्चों को राधा और कृष्ण के रूप में सजाते हैं और मंदिरों के दर्शन करने जाते हैं. हर कोई भगवान के दर्शन करना चाहता है. भगवान के जन्मस्थल मथुरा में तो देश विदेश से भगवान कृष्ण के भक्त आते हैं और प्रभु के दर्शन कर अपने जीवन को सफल बनाते हैं.

जन्माष्टमी 2018 – Janmashtami 2018 date

जन्माष्टमी 2018 में कृष्ण जन्‍माष्‍टमी 2 सितंबर को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी का शुभ मुहूरत 2 सीट रात 8 बजे से 3 सितंबर शाम 7 बजे तक का है. इस दिन भक्‍त पूरे दिन व्रत रखकर कृष्‍ण जन्‍म के उपरांत प्रसाद ग्रहण करते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं की वो अपनी कृपा उनपर हमेशा बनाए रखें.

जन्माष्टमी 2018 पूजा का शुभ मुहूर्त

Janmashtami Puja Shubh Muhurat 2018

इस बार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 2 सितंबर को पड़ रही है और इस दिन कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी मनाई जाएगी. इस साल जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूरत पूरे 45 मिनट का है. इस साल जन्‍माष्‍टमी पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11.57 से 12.40 तक है. इस साल अष्‍टमी तिथि का आरंभ रविवार 2 सितंबर 2018 को रात 8.47 बजे से सोमवार 3 सितंबर शाम 7.19 तक होगा. इसका मतलब व्रत सोमवार 3 सितंबर को शाम 7.19 के बाद खोला जाएगा.

जन्माष्टमी क्यों मनाते है?

Why do we celebrate Janamashtami in Hindi

हिंदू धर्म में पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी में बढ़ते पाप और पापियों से अपने भक्तों की रक्षा करने हेतु कृष्ण रूप में अवतार लिया. भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी को मध्यरात्रि 12 बजे देवकी और वासुदेव के पुत्ररूप में हुआ था.  श्रीकृष्ण को जन्म माता देवकी ने दिया था लेकिन उनका पालन पोषण माता यशोदा ने किया. श्रीकृष्ण के मामा कंस को श्राप मिला था की उनका वध माता देवकी की कोख से जन्म लेने वाली 7 वीं संतान करेगी. कंस ने अपनी मौत के. से देवकी और वासुदेव के 6 संतानों को मार दिया था. लेकिन 7वीं संतान को वो नही मार पाया. यही 7वीं संतान भगवान श्रीकृष्ण थे और इन्ही ने बाद में. कंस का वध कर इस दुनिया को उसके पापों से मुक्त किया था. इसीलिए भगवान कृष्ण के जन्मदिन को हिंदू धर्म के अनुयायी जन्माष्टमी के पर्व के रूप में मनाते है.

जन्माष्टमी कैसे मनाते है? How is Janmashtami Celebrated in India

Janmashtami Celebration in Hindi

जन्माष्टमी हर जगह अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है. कहीं पर लोग रंगों की होली खेलते हैं तो कहीं फूलों की वर्षा करते हैं. तो कहीं दही हांडी फोड़ने का उत्सव मनाया जाता है. इस तरह इस दिन भगवान के अनेकों रूपों और मोहक छवियां देखने को मिलती हैं. कृष्ण बचपन से ही बहुत नटखट थे और अपने साथियों संग खूब सरारत करते थे.

इस दिन मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता हैं. लोग इस दिन व्रत एवं उपवास करते हैं. मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है तथा कृष्ण रासलीलाओं का आयोजन किया जाता है. श्रीकृष्ण की जन्मनगरी मथुरा में इस दिन को बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है. स्कूलों में भी विशेष आयोजन किए जाते हैं जिनमे नन्हें नहें बचे कृष्ण और राधा बनकर स्कूल जाते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं.

जन्माष्टमी का महत्व

Importance of Janmashtami Celebration in Hindi

जब-जब धरती पर पाप, अत्याचार और हिंसा बढ़े हैं और धर्म का पतन हुआ है तब-तब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लिया है और सत्य और धर्म की स्थापना की है. जब कंस जैसे अत्याचारी, पापी और अधर्मी लोगों का पाप बढ़ गया और धर्म का पतन होने लगा तब भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया. मानव जीवन और धर्म की रक्षा की. जन्माष्टमी पर्व हमें सचाई, अहिंसा और धर्म के पालन करने का संदेश देता है. पाप और अहिंसा कितना ही बलवान क्यूँ ना हो जाए एक दिन उसकी हार निश्चित है.

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