तुंगनाथ मंदिर का इतिहास Tungnath history in hindi

Tungnath Temple History- तुंगनाथ मंदिर विश्व का सबसे अधिक उँचाई में स्थित भगवान शिव का मंदिर है. तुंगनाथ मंदिर समुद्रतल से 12073 फिट की उँचाई tungnath temple height पर स्थित है.

भगवान शिव के पाँच केदारों में से दूसरे केदार को तुंगनाथ के नाम से जाना जाता है. कुल पाँच केदारों में तुंगनाथ का विशेष स्थान है. कहा जाता है की भगवान राम रावण का वध करने के बाद चंद्राशीला लेख आए थे और उन्होने यही ध्यान लगाया था.

आज हम अपनी इस पोस्ट में तुंगनाथ मंदिर के बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं. अगर आप कभी भी उत्तराखंड स्थित चारधाम की यात्रा पर नही गये हैं और आपने केदारनाथ धाम के दर्शन नही किए हैं तो आपको अपने जीवन में एक बार केदारनाथ धाम और छोटा चारधाम यात्रा जरुर करनी चाहिए. हमारी पोस्ट केदारनाथ कैसे पहुँचे जरूर पढ़ें और चारधाम उत्तराखंड की यात्रा से संबंधित जानकारी प्राप्तकरें.

हिंदू शास्त्रों के अनुसार महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपनों को मारने के बाद व्याकुल थे और पांडवों को कुछ समझ नही आ रहा था की वो अब क्या करें. अपनी व्याकुलता को दूर करने के लिए पाँचो पांडव महर्षि व्यास के पास गए. महर्षि व्यास ने उन्हें बताया कि उनके द्वारा भाईयों और गुरुओं को मारने के बाद सभी पांडव ब्रहंम हत्या के कोप में आ चुके हैं ऐसे में अब उनको केवल भगवान शिव ही बचा सकते हैं.

इसके बाद पांडव महर्षि व्यास की सलाह पर भगवान शिव के पास हिमालय गये. सभी पांडवों को पता चल गया था की महाभारत के युद्ध के चलते भगवान शिव उनसे नाराज हैं. भगवान शिव को जब यह पता चला की सभी पांडव उनसे मिलने हिमालय आ रहे हैं तो भगवान शिव ने उन सभी को भ्रमित करने के लिए भैसे का रूप धारण कर लिया और भैंसों के झुंड के साथ वहाँ से निकल गये. लेकिन पांडव नहीं माने और भीम ने भैंसे का पीछा किया इस तरह शिव के अपने शरीर के हिस्से पांच जगहों पर छोड़े ये स्थान केदारधाम यानि पंच केदार कहलाए.

हिंदू शस्त्रों के अनुसार तुंगनाथ में ही भगवान का “बाहु” यानी भुजा यही स्थापित है. कहा जाता है की तुंगनाथ का मंदिर लगभग एक हज़ार साल पुराना है. पाँच केदारों में तुंगनाथ का बहुत ही अहम स्थान है. माना जाता है की तुंगनाथ मंदिर में सच्चे मान से माँगा गया वरदान इंसान को जरूर मिलता है. इसलिए पाँचो केदार में तुंगनाथ मंदिर का विशेष स्थान है.

कहा जाता है कि पांडवों ने बनाया तुंगनाथ मंदिर की स्थापना की थी. भगवान शिव को प्रशन्न करने के लिए पांडवों ने तुंगनाथ मंदिर का निर्माण किया था. तुंगनाथ मंदिर के दर्शन को हर साल भारी संख्या में भक्तगण यहाँ आते हैं. सभी केदारों में तुंगनाथ का मंदिर सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान है. तुंगनाथ मंदिर के चोरों ओर का नजारा देखने लायक होता है क्यूंकी तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है. यही तीनों धारायें मिलकर अक्षकामिनी नदी बनती हैं. जो तुंगनाथ के समीप से बहती है. तुंगनाथ का मंदिर उत्तराखंड के जनपद रुद्रप्रयाग में स्थित है और चोपता से तीन किलोमीटर दूर स्थित है.

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भगवान राम आए थे तुंगनाथ Tungnath dham & Lord Ram

पुराणों के अनुसार भगवान राम रावण का वध करने के बाद तुंगनाथ आए थे. कहा जाता है की श्रीराम, भगवान शिव को अपना भगवान मानकर पूजते थे. पुराणो के अनुसार श्रीराम ने रावण का वध करने के बाद यहाँ चंद्रशिला आकर ध्यान किया था. इसीलिए भी तुंगनाथ मदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है.

तुंगनाथ मंदिर से हिमालय बहुत ही नजदीक है. तुंगनाथ से बर्फ से ढाकी हिमालय की चोटियाँ दिखती है. यहाँ का मौसम बहुत ही सुहाना और रमणीय होता है. ठंड के समय यहाँ बर्फ ही बर्फ देखने को मिलती है.

तुंगनाथ मंदिर की फोटो Tungnath temple images

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चोपता तुंगनाथ के नज़दीक ही चोपता हिल स्टेशन हैं जिसे भारत का स्विट्जेरलेंड कहा जाता है. ब्रिटिश कमिश्नर एटकिन्सन ने चोपता आकर कहा था की जिसने चोपता नहीं देखा, उसका जीवन व्यर्थ है. चोपता की समुद्र तल से उँचाई 2,680 मीटर (8,790 फुट) हैं. चोपता से तुंगनाथ तुंगनाथ मंदिर और चंद्रशिला चंद्रशिला ट्रेक के लिए पैदल यात्रा शुरू होती है. सर्दियों के वक्त अत्यधिक बर्फ पड़ने की वजह से शिवलिंग को तुंगनाथ से चोपता पूरे पारंपरिक तरीके से लाया जाता है और गर्मियों में वापस तुंगनाथ लाया जाता है.

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किस समय जायें तुंगनाथ मंदिर Best time to visit tungnath dham

क्यूंकी ठंडियों में यहाँ बहुत ज्यादे बर्फवारी होती है और रास्ते बंद हो जाते हैं इसलिए ठंडियों में यहाँ दर्शन नही हो पाते हैं. तुंगनाथ मंदिर दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय मार्च महीने से अक्तूबर महीने के बीच का समय सबसे अच्छा माना जाता है.  आप मार्च से अक्तूबर महीने के बीच कभी भी यहाँ दर्शन के लिए जा सकते हैं लेकिन याढ़ रहे साथ में गर्म कपड़े जरूर हों क्यूंकी यहाँ का मौसम कभी भी बदल जाता है और ठंड पड़ने लगती है.

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